गुरुवार, 12 दिसंबर 2024

तलाक तलाक तलाक


एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर अतुल  ने अपनी पत्नी व ससुराल वालो की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली। यह कुछ आश्चर्यजनक नही है। ख़ासतौर पर जहाँ पत्नी के माता-पिता उसका आँख बंद कर पक्ष लेते हो वहाँ समस्या विकराल हो जाती है इस पर 'एक तो करेला, दूसरा नीम चढ़ा' वाली कहावत चरितार्थ करते हुए एक फैमिली कोर्ट की महिला जज उसका नज़रिया भी ठीक नही है किसी भी व्यक्ति को उसके humiliation के अंतिम छोर तक पहुँचा देता हैं जिसके आगे पढ़े लिखे व्यक्ति को भी रास्ता नहीं सूझता।

आइये सबसे ज़रूरी पहली बात समझेः

ज्यूडीशरी क्यों महत्वपूर्ण है और जज की क्या भूमिका है? 

जब पारिवारिक प्रकरण में पति पत्नी फैमिली कोर्ट में जाते है तो जज का काम दोनों पक्षों की पारिवारिक पृष्ठभूमि समझना पति व पत्नी के परिवार की आर्थिक स्थिति समझना और जो सबूत कोर्ट में रखे जाते हैं जो बाते कही जाती हैं उससे परे यह समझना कि कौन सच बोल रहा हैं कौन झूठ और फिर प्रकरण को आगे बढ़ाना। आजकल के बहुत से जज न तो इस बात को समझते है न ही शायद उन्हें ट्रेनिंग में बताया जा रहा है। 

यदि कोर्ट में सिर्फ़ फैक्ट से ही काम चलता है तो जज की जरुरत नही है कम्प्यूटर में फैक्ट फीड करो दो मिनट में जजमेंट निकल आयेगा।

इसलिए ही जज बहुत जरुरी है। ख़ासतौर पर तलाक़ के प्रकरण में जज को यह समझना बहुत ज़रूरी है कि दोनो पक्ष अत्यधिक तनाव में होते हैं। कई हार उनकी सोचने समझने की शक्ति भी नहीं रहती अक्सर पीडीत पक्ष के पास सबूत नही होते उसका वकील भी कमजोर हो सकता है और इसलिए जज को सहानुभूति पूर्वक प्सरकर को ठीक से समझना होता है उसी अनुसार पक्षो को गाइड करना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्य से कोर्ट में केस लम्बे चलते है और जज बार बार बदलते रहते हैं । कभी पीड़ित व्यक्ति के फेवर में सबूत नही है लेकिन आदमी सच बोल रहा है तो बुद्अधमा जज अपने जजमेंट में कहीं न कहीं उसके लिए जगह दे देता है या कुछ लाभ तो दे ही देता है। 


दूसरी प्राइमरी बात 498A प्रकरणों में यह है कि पत्नी बढ़ चढ़ कर आरोप लगाती है कि हमने इतने लाख का गोल्ड दिया है केश दिया है मेरिज हॉल व पार्टी और सबमे इतना पैसा दिया है लेकिन एक भी पति पक्ष का वकील ना जज पत्नी पक्ष से सवाल करता है कि आपके पिता की क्या हैसियत है उनकी सेलरी कितनी है कितना पैसा वे अपनी फैमिली चलाते हुए शादी के लिए बचा सकते थे और यह सब जो बता रही है उसके बिल कोर्ट में पेश करे। यदि ऐसा हो तो दहेज के प्रकरण 498A जिसमें कई लोगों को मैंने परिवार सहित जेल जाते देखा है बच जाये।

एकऔर बात पेरेटिंग से तालुक रखती है हर माता-पिता अपने बच्चों को NEET IIT कराने के चक्कर में हर समय बच्चे को ट्यूशन, कोचिंग,  कोटा जैसी जगहो पर प्राइमरी से ही इतना पीछे लगते है कि जैसे तैसे बच्चा IIT पास कर लेगा तो जीवन सुधर जाएगा। मैं जितने भी ऐसे सॉफ्टवेयर इंजीनियर या डॉक्टर या ऐसे लोगों को जानता हूँ उनके पास सिर्फ़ पैसा है पर दुनियादारी को समझने की अकल नहीं। ये ही लोग साइबर क्राइम, डिजिटल अरेस्ट के शिकार होते हैं। वे बहुत बड़े स्टेटस में है तो वे ही माता-पिता अब उनके स्टेटस के अनुसार नही है और इसलिए या तो वे साथ रहते नही रखते नहीं और कभी किसी को बच्चे का साथ रहने को मिलता है और घर में किटी पार्टी है गेस्ट आ रहे है तो माता-पिता को इंस्ट्रक्शन होता है वे अपने कमरे में रहे बाहर न आए वरना उनकी इज्जत में इज़ाफ़ा कम हो जाएगा।यह सब अपनी दुर्गति तो कराना ही है साथ में बच्चे का भविष्य भी खराब करना है। 

क्यों? दरअसल इसलिए कि जो बच्चे सारी ज़िंदगी पढ़ते रहते है उनको दुनिया दारी नही आती उनके विपरीत परिस्थितियों की न तो समझ है न निपटना आता हैं।

इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि यदि आप बच्चे को ज्यादा पढ़ाना लिखाना चाहते है तो उसको पारिवारिक संस्कार भी दे और बच्चे को गली मोहल्ले में दूसरे बच्चों के साथ खेलने भी दे। उसको मिट्टी में गिरने दे चोंट लगने दे। मुझे याद है हम रोज शाम को धूल धूसरित होकर आते है और आये दिन कभी हमारे घुटने छिले होते थे तो कभी अंगूठा में से खून निकल रहा होता था। बच्चे का स्ट्रीट स्मार्ट होना बहुत जरुरी है।


आखिरी बात यह है कि एक तलाक के केस को निपटना इतना मुश्किल भी नही है यदि आप स्ट्रीट स्मार्ट  है। तब आप ऐसी कितनी ही कठिन परिस्थितियों से आसानी ले निपट सकते है। यह सब दबाव झेल सकते हैं ।


 लेकिन अतुल जैसे लोग ज़िंदगी की पर्याप्त समझ न होने विषम परिस्थिति में ज़िन्दगी से हार जाते है।


शुक्रवार, 8 नवंबर 2024

ट्रम्प की जीत के मायने!


सारी दुनिया की निगाहें इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पर लगी हुई थी। सबके अपने अपने निजी कारण थे।

1. सबसे पहले यूक्रेन व रशिया के बीच कभी न ख़त्म होने वाले युद्ध सिर्फ़ अमेरिका के सपोर्ट के कारण दो साल से चल रहा था। 

2. दरअसल अमेरिका की इकॉनॉमी का 70% हथियारों से आता है यहाँ फाइटर जेट से लेकर मशीनगन तोपें मिसाइल असाल्ट रायफ़ल्स पिस्टल हेलमेट जिनमें अंधेरे में देख सकने से लेकर सारे सेंसर लगे होते है गरज यह कि हर कुछ वहाँ से खरीदा जा सकता है । 

3. यह हथियार निर्माता चाहते है कि दुनिया में युद्ध चलते रहे और इसलिए उनकी एक बड़ी लॉबी ऐसा राष्ट्रपति चाहते है जो आग में घी डालता रहे।


4. 1960 से शीत युद्ध के दौरान प्रो वेस्ट साउथ विएतनाम को सैन्य मदद करता रहा। लाखो अमेरिकी सैनिक हर साल वहाँ जा रहे थे हर किस्म के हथियार भी कार्गो हवाई जहाज ले जा रहे थे पहली बार वहाँ नेपाम बम उपयोग में लाये गये जिससे सिर्फ़
आग लग जाती थी। उत्तरी विएतनाम ने हो चि मिन्ह के नेतृत्व में अंततः 1975 में दक्षिण विएतनाम को मिलाकर एकीकरण कर दिया यह अमेरिका की बहुत बड़ी हार थी। 



5. यह अफ़ग़ानिस्तान में दोहराया गया पहले अफ़ग़ानिस्तान को मदद की गयी रशिया के खिलाफ रशिया के वहाँ से हटने के बाद तालिबान स्थापित हुए फिर 9/11 हुआ और अमरीकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के खिलाफ उतरे अंततः हार कर वापिस आ गये

6. अब यूक्रेन रशिया युद्ध तो चल ही रहा है इज़राइल हमास हिज़्बुल्लाह इराक़ लेबनान सब बेतहाशा फुल स्केल वार में शामिल है।



7. अमेरिकी हथियार निर्माताओं की पो बारह है और इसलिए ही ट्रम्प के पिछले चुनाव में उनको हराने व कठपुतली राष्ट्रपति बनाने के लिए बाइडेन को जीताने मे सारी ताकत लगा दी थी व सफल भी हुऐ थे।

8. ट्रम्प एक व्यापारी है लेकिन इसके बावजूद अमेरिका को लेकर उनकी पॉलिसी स्पष्ट है। वे शरणार्थियों व विदेशियों के लेकर उदारवादी नही है। अमेरिका का पूरी दुनिया में अलग-अलग जगहो पर युद्ध में शामिल होना और अमेरिकी सैनिकों का उसमें अकारण जान गँवाना भी उन्हें पंसद नही है।


9. इस बार उन्होंने गलती नही की और चुनाव में अपने ख़िलाफ़ नेगेटिव नेरेटिव सेट नही होने दिया जो कि हथियार लॉबी की मदद से वामपंथी विचारधारा के लोग करते हैं बिलकुल भारत की तरह की संविधान खतरे में है, देश बेच देंगे, सेक्युलरिज्म को ख़त्म कर देंगे राजदीप सरदेसाई के अनुसार इस्लामोफोबिया कर देंगे।



10. अब यूक्रेन को मिलने वाली मदद कम हो जायेगी और यूक्रेन को रशिया से जल्द समझौता करना होगा।

11. नाटो देश शांत हो कर राहत की सांस लेंगे क्योंकि उनके उपर मंडरा रही युद्ध की विभीषिका ख़त्म हो जायेगी । सुरक्षा के नाम पर उनको बेचे जा रहे हथियारों की ख़रीद की अब उनको जरुरत नही रहेगी। वे आर्थिक तरक़्क़ी की तरफ बढ़ेंगे।

12. ट्रम्प व मोदी में एक समानता है कि वे वामपंथी विचारधारा या अगर कुछ प्रबुद्ध लोग जो डीप स्टेट के बारे में समझते है उसके इशारों पर चलने वाले लोग नही है।

13. मोदी ने अपने पहले दो कार्यकाल में वादे तो बहुत किये परंतु निभा नही पाये। धारा 370 हटाने व ट्रिपल तलाक़ क़ानून के अलावा वे एक भी भ्रष्टाचारी को सजा नही दिलवा पाए। लालू यादव जैसे सजायाफ्ता लोग जमानत पर फ़ाइव स्टार ज़िंदगी जी रहे है अरविंद केजरीवाल की टीम जेल में मसाज करवा रहे है होटल से खाना खा रहे है कुछ नही हुआ। हेमंत सोरेन भी बाहर घूम रहे है। अजित पंवार से समझौता बहुत मँहगा पड़ा इस लोकसभा चुनाव में और चंद्रा बाबू नायडू को क्लीन चिट मिल ही गयी है इसके अलावा कई भ्रष्टाचार के आरोप वाले नेताओ को पार्टी में बग़ैर उनकी रणनीतिक योग्यता के लेना भारी पड़ गया। दलित व मुस्लिम वोट भाजपा से पूरी तरह छिटक गया है और सबका साथ सबका विकास लेकिन बहुत से अपर कास्ट, दलित मुस्लिम का विश्वास नही के कारण 244 पर सिमट लिए।




14. इसके अलावा नरेंद्र मोदी और उनकी टीम अपने ख़िलाफ़ नेगेटिव नेरेटिव की काट करने में विफल रही। सोशल मिडिया आई टी सेल ना तो आक्रामक रहे ना ही डिफेंड कर पाए।

15.इसमें कोई संदेह नही की ट्रम्प की जीत में इस बार सबसे बड़ा योगदान अमेरिकी हिंदू वोट का रहा जो पिछली बार से 9% ज़्यादा मिले। 

16. ट्रम्प की जीत के मायने यह है कि हँलाकि 2029 का चुनाव नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नहीं लड़ा जाएगा लेकिन भाजपा की जीत काफी हद तक निश्चित है। इस अमेरिकी चुनाव में हिंदू वोटों की एकजुटता से भारत के हिंदू वोट भी एक जुट होने जा रहे है। 

17. इसका ट्रायल अब महाराष्ट्र, झारखंड व यूपी के उप चुनाव में देखने को मिल सकता है। 



मंगलवार, 6 अगस्त 2024

क्या भारत में तख्ता पलट हो सकता है?


बांग्लादेश देश की इकॉनॉमी पाकिस्तान श्रीलंका और कई देशों से अच्छी थी। फिर वहाँ क्यों आरक्षण पर इतना विवाद और प्रोटेस्ट हुआ कि श्रीलंका की तरह पब्लिक सड़कों पर उतर आयी संसद व प्रधानमंत्री आवास तक चली गयी। 

जिस तरह से लोग कुर्सियाँ पंखे सोफे लूट लूट कर ले जा रहे थे उसने मुझे ३१ अक्टूबर १९८४ में इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद इंदौर में पब्लिक को सरदार घरों में से सामान लूट कर ले जाते देखा था। उनकी लड़कियाँ महिलाएँ ऐसे ही घर के दरवाज़ों में सोफे व सामान लगा लगा कर चिल्ला रही थी लोग जलते टायर उनके घरो में फेंक रहे थे। यह राजनैतिक अराजकता है जब पुलिस और सेना भी दंगाइयों के साथ खड़ी नही भी होती हैं तो कुछ करती भी नहीं। 


आखिर छोटी मोटी घटनाओं के बाद अचानक ऐसा बवाल क्यों मचता है ये कौन लोग हैं जो अचानक सड़कों पर उतर आते है और देखते ही देखते तख्ता पलट कर देते है। याद करें एक अमेरिकी पुलिस वाले ने एक अफ्रीकी मूल के व्यक्ति को अरेस्ट किया था उसके हाथापाई करने पर उसे गिरा कर बूट उसके मुँह पर रखा और यह विडियो फोटो “ Blake live’s matters “ करके इतना प्रचारित हुआ कि ट्रम्प चुनाव जीतते जीतते हार गये।


इंदिरा गाँधी हमेशा सेना द्वारा तख़्ता पलट को लेकर सशंकित रहती थीं। इंदिरा गांधी विश्वस्त व्यक्तियों को प्राथमिकता से हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता को नज़रअंदाज़ करके चीफ़ जस्टिस नियुक्त करती थी। सेना के प्रमुख पदो पर भी नियुक्तियों में वरिष्ठता के बजाय विश्वसनीय लोगो पर ध्यान होता था। यहाँ तक भी उनके कार्यकाल में राष्ट्रपति भी उनके विश्वस्त व्यक्ति ही थे। हालाँकि उनके राजेंद्र धवन जैसे सलाहकार हमेशा कहते थे कि भारत एक विशाल देश है और इसमें तख्ता पलट संभव नहीं है। सेना के तीन विभाग है और वे अलग-अलग है और भी अलग-अलग परिस्थितियाँ है। शायद इसलिए ही चीफ़ ऑफ आर्मी स्टॉफ की पोस्ट भी हमेशा खाली रही। उन्होंने सिर्फ़ एक गलती की वो यह की ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार के बाद सिक्योरिटी वार्निंग के बाद भी निजी सुरक्षा गॉर्डो की वेटिंग नही की।


मुझे लगता है कि यह मिथ ही है कि आज भारत में तख्ता पलट नहीं हो सकता है। नरेंद्र मोदी उसी राह पर चल रहे है जिस पर हसीना शेख चली। यह फील गुड फेक्टर और बार बार भ्रष्टाचार को मिटाने के वादे करना लेकिन धरातल पर वे एक भी बड़े राजनीतिक भ्रष्टाचारी पर निर्णायक बिन्दु तक केस नहीं पहुँचा सके। ज्यूडीशरी पर नरेंद्र मोदी का कोई नियंत्रण नहीं है। यह कैसा न्याय तंत्र है की चीफ जस्टिस की चलती अदालत के बीच मनु संघवी पवन खेड़ा की बेल अप्लाय करते है और १० मिनट में जमानत मिल जाती हैं । तीस्ता सितलवाड की बेल हाईकोर्ट कैंसिल करता है छुट्टी के दिन शाम ७ बजे बीच भरतनाट्यम डांस प्रोग्राम से उठ कर चीफ़ जस्टिस आते है व जमानत दे कर फिर नाच देखने चले जाते है। वहीं दूसरी और बिहार का मनीष बार बार सुप्रीम कोर्ट जाता है उसे वह सुनने के लिए ही तैयार नही उसको १० महीने बाद जमानत मिलती हैं।


प्रधानमंत्री भी देश के एडमिनिस्ट्रेटर है वे कोई सवाल नही करते चीफ़ जस्टिस से? पब्लिक फोरम पर तो ऐसी विसंगति के बारे में बोल सकते है? दिल्ली के शीशमहल शराब घोटाले वाड्रा के डीएलएफ के जमीन घोटाले नेशनल हेरल्ड के व राहुल की ब्रिटेन की नागरिकता आदि ऐसे विषय है जिनमें डॉक्यूमेंटरी एविडेंस है लेकिन सालो से ये ही लोग दबा कर बैठे हैं । अब नरेन्द्र मोदी को लगता है की जीवन में जो कुछ अचिव करना था उससे ज़्यादा मिल गया है। अब बस नोबेल पीस प्राइज़ और मिल जाये बहुत है। 


लेकिन वर्तमान हालात और देश में राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता ख़ासतौर पर लगभग सभी वर्ग के लोग व जातियों का साथ देख कर ऐसा लगता है नरेंद्र मोदी के हाथ से सत्ता फिसलती जा रही है।

Team Modi अब उनके ख़िलाफ़ चलाये जा रहे नरेटिव का जवाब नहीं दे पा रहे। आई टी सेल निष्क्रिय है ज्यूडीशरी पर नियंत्रण नही है और यह लापरवाही एक अच्छी सरकार को ले डूबेगी।

#narendramodi_primeminister

#NarendraModi

#AmitShah

#RahulGandhi

नोटः- यह विशुद्ध मेरे विचार से वर्तमान हालात पर विश्लेषणात्मक टिप्पणी है इसका किसी पार्टी पोलिटिक्स से लेना देना नहीं है।