शुक्रवार, 8 नवंबर 2024

ट्रम्प की जीत के मायने!


सारी दुनिया की निगाहें इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पर लगी हुई थी। सबके अपने अपने निजी कारण थे।

1. सबसे पहले यूक्रेन व रशिया के बीच कभी न ख़त्म होने वाले युद्ध सिर्फ़ अमेरिका के सपोर्ट के कारण दो साल से चल रहा था। 

2. दरअसल अमेरिका की इकॉनॉमी का 70% हथियारों से आता है यहाँ फाइटर जेट से लेकर मशीनगन तोपें मिसाइल असाल्ट रायफ़ल्स पिस्टल हेलमेट जिनमें अंधेरे में देख सकने से लेकर सारे सेंसर लगे होते है गरज यह कि हर कुछ वहाँ से खरीदा जा सकता है । 

3. यह हथियार निर्माता चाहते है कि दुनिया में युद्ध चलते रहे और इसलिए उनकी एक बड़ी लॉबी ऐसा राष्ट्रपति चाहते है जो आग में घी डालता रहे।


4. 1960 से शीत युद्ध के दौरान प्रो वेस्ट साउथ विएतनाम को सैन्य मदद करता रहा। लाखो अमेरिकी सैनिक हर साल वहाँ जा रहे थे हर किस्म के हथियार भी कार्गो हवाई जहाज ले जा रहे थे पहली बार वहाँ नेपाम बम उपयोग में लाये गये जिससे सिर्फ़
आग लग जाती थी। उत्तरी विएतनाम ने हो चि मिन्ह के नेतृत्व में अंततः 1975 में दक्षिण विएतनाम को मिलाकर एकीकरण कर दिया यह अमेरिका की बहुत बड़ी हार थी। 



5. यह अफ़ग़ानिस्तान में दोहराया गया पहले अफ़ग़ानिस्तान को मदद की गयी रशिया के खिलाफ रशिया के वहाँ से हटने के बाद तालिबान स्थापित हुए फिर 9/11 हुआ और अमरीकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के खिलाफ उतरे अंततः हार कर वापिस आ गये

6. अब यूक्रेन रशिया युद्ध तो चल ही रहा है इज़राइल हमास हिज़्बुल्लाह इराक़ लेबनान सब बेतहाशा फुल स्केल वार में शामिल है।



7. अमेरिकी हथियार निर्माताओं की पो बारह है और इसलिए ही ट्रम्प के पिछले चुनाव में उनको हराने व कठपुतली राष्ट्रपति बनाने के लिए बाइडेन को जीताने मे सारी ताकत लगा दी थी व सफल भी हुऐ थे।

8. ट्रम्प एक व्यापारी है लेकिन इसके बावजूद अमेरिका को लेकर उनकी पॉलिसी स्पष्ट है। वे शरणार्थियों व विदेशियों के लेकर उदारवादी नही है। अमेरिका का पूरी दुनिया में अलग-अलग जगहो पर युद्ध में शामिल होना और अमेरिकी सैनिकों का उसमें अकारण जान गँवाना भी उन्हें पंसद नही है।


9. इस बार उन्होंने गलती नही की और चुनाव में अपने ख़िलाफ़ नेगेटिव नेरेटिव सेट नही होने दिया जो कि हथियार लॉबी की मदद से वामपंथी विचारधारा के लोग करते हैं बिलकुल भारत की तरह की संविधान खतरे में है, देश बेच देंगे, सेक्युलरिज्म को ख़त्म कर देंगे राजदीप सरदेसाई के अनुसार इस्लामोफोबिया कर देंगे।



10. अब यूक्रेन को मिलने वाली मदद कम हो जायेगी और यूक्रेन को रशिया से जल्द समझौता करना होगा।

11. नाटो देश शांत हो कर राहत की सांस लेंगे क्योंकि उनके उपर मंडरा रही युद्ध की विभीषिका ख़त्म हो जायेगी । सुरक्षा के नाम पर उनको बेचे जा रहे हथियारों की ख़रीद की अब उनको जरुरत नही रहेगी। वे आर्थिक तरक़्क़ी की तरफ बढ़ेंगे।

12. ट्रम्प व मोदी में एक समानता है कि वे वामपंथी विचारधारा या अगर कुछ प्रबुद्ध लोग जो डीप स्टेट के बारे में समझते है उसके इशारों पर चलने वाले लोग नही है।

13. मोदी ने अपने पहले दो कार्यकाल में वादे तो बहुत किये परंतु निभा नही पाये। धारा 370 हटाने व ट्रिपल तलाक़ क़ानून के अलावा वे एक भी भ्रष्टाचारी को सजा नही दिलवा पाए। लालू यादव जैसे सजायाफ्ता लोग जमानत पर फ़ाइव स्टार ज़िंदगी जी रहे है अरविंद केजरीवाल की टीम जेल में मसाज करवा रहे है होटल से खाना खा रहे है कुछ नही हुआ। हेमंत सोरेन भी बाहर घूम रहे है। अजित पंवार से समझौता बहुत मँहगा पड़ा इस लोकसभा चुनाव में और चंद्रा बाबू नायडू को क्लीन चिट मिल ही गयी है इसके अलावा कई भ्रष्टाचार के आरोप वाले नेताओ को पार्टी में बग़ैर उनकी रणनीतिक योग्यता के लेना भारी पड़ गया। दलित व मुस्लिम वोट भाजपा से पूरी तरह छिटक गया है और सबका साथ सबका विकास लेकिन बहुत से अपर कास्ट, दलित मुस्लिम का विश्वास नही के कारण 244 पर सिमट लिए।




14. इसके अलावा नरेंद्र मोदी और उनकी टीम अपने ख़िलाफ़ नेगेटिव नेरेटिव की काट करने में विफल रही। सोशल मिडिया आई टी सेल ना तो आक्रामक रहे ना ही डिफेंड कर पाए।

15.इसमें कोई संदेह नही की ट्रम्प की जीत में इस बार सबसे बड़ा योगदान अमेरिकी हिंदू वोट का रहा जो पिछली बार से 9% ज़्यादा मिले। 

16. ट्रम्प की जीत के मायने यह है कि हँलाकि 2029 का चुनाव नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नहीं लड़ा जाएगा लेकिन भाजपा की जीत काफी हद तक निश्चित है। इस अमेरिकी चुनाव में हिंदू वोटों की एकजुटता से भारत के हिंदू वोट भी एक जुट होने जा रहे है। 

17. इसका ट्रायल अब महाराष्ट्र, झारखंड व यूपी के उप चुनाव में देखने को मिल सकता है। 



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